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चित्रकूट: जहाँ 'अधिकार' नहीं, 'संवेदना' जीत गई! एक छात्र की सजगता और डीएम पुलकित गर्ग की दरियादिली ने बदली बेसहारा वृद्ध महिला की तक़दीर।

 चित्रकूट: जहाँ 'अधिकार' नहीं, 'संवेदना' जीत


गई!

एक छात्र की सजगता और डीएम पुलकित गर्ग की दरियादिली ने बदली बेसहारा वृद्ध महिला की तक़दीर।

​जब रामघाट की सीढ़ियों पर थमी सांसें, कलेक्ट्रेट में मिली पनाह


अमर ज्योति न्यूज़ /चित्रकूट।  चित्रकूट के पवित्र रामघाट की पथरीली सीढ़ियों पर घिसटती हुई ज़िंदगी और भीख मांगकर गुज़ारा करती वृद्ध माया देवी के लिए शायद उम्मीद की लौ बुझ चुकी थी। बीमारी से जर्जर शरीर और लाचारी के बोझ तले दबी माया देवी की हालत पर जब *छात्र प्रिंस गुप्ता* की नज़र पड़ी, तो उसने प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना सीधे सत्ता के सर्वोच्च द्वार यानी *जिलाधिकारी पुलकित गर्ग* के दफ्तर की कुंडी खटखटा दी।

​कुर्सी का गुरूर नहीं, मानवता का नूर

​अक्सर कलेक्ट्रेट की चौखट आम आदमी के लिए भारी होती है, लेकिन डीएम पुलकित गर्ग ने साबित कर दिया कि एक राजा (प्रशासक) वही श्रेष्ठ है जिसके दरबार में ग़रीब को न्याय और स्नेह साथ मिले।

​तत्काल एक्शन: डीएम ने न केवल महिला की पीड़ा को सुना, बल्कि अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत CMO और समाज कल्याण अधिकारी को तलब किया।

​इलाज और सुरक्षा: उन्होंने फाइलें नहीं दौड़ाईं, बल्कि एंबुलेंस दौड़वाई। माया देवी को पहले जिला अस्पताल में सम्मानजनक इलाज मिला।

​5 दिन का संकल्प: सड़क से सम्मान तक

​15 अप्रैल को जो महिला बेसुध होकर मदद की आस में कलेक्ट्रेट पहुंची थी, महज़ 5 दिनों के भीतर उसकी दुनिया बदल गई। 20 अप्रैल को जब वह स्वस्थ होकर वृद्धाश्रम की सुरक्षित पनाह में पहुंची, तो उसकी आँखों से छलके आंसू जिलाधिकारी की सफलता की सबसे बड़ी गवाही थे।

​"जब शासक का हृदय दयालु हो, तो प्रजा के दुखों का अंत निश्चित है।"

​वृद्ध माया देवी ने कंपकंपाते हाथों से जब डीएम पुलकित गर्ग के सिर पर दुआओं का हाथ रखा, तो वह दृश्य किसी फ़िल्मी पटकथा से भी अधिक रोमांचक और मार्मिक था। चित्रकूट आज अपने इस 'जनता के कलेक्टर' की सादगी और कर्तव्यनिष्ठा पर गर्व कर रहा है।

​निष्कर्ष: यह महज़ एक प्रशासनिक आदेश नहीं था, बल्कि मानवता के प्रति एक अटूट विश्वास की बहाली थी। जिलाधिकारी की इस सौम्यता ने यह मिसाल पेश की है कि व्यवस्था अगर चाहे, तो किसी भी 'निराश्रित' को 'आश्रित' बनने में देर नहीं लगती।

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