अमर ज्योति न्यूज़, वसई । वसई के एवर शाइन सिटी के अंदर स्थित पहाड़ों की तलहटी और प्रकृति की गोद में बसा हुआ रमणीय "श्री हंस विजयनगर आश्रम " जिसके मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करते ही सद्भावना का एक रोमांचित अनुभव होने लगता है, ऐसे पवित्र आश्रम के अंदर दिनांक 1 मई को महाराष्ट्र दिन और बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर विशाल सद्भावना सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें दूर-दूर से पधारे संत महात्मा गणों ने अपने अनुभवी विचारों से जनमानस को कृतार्थ किया ।
नवी मुंबई के बेलापुर आश्रम से पधारे महात्मा पारसमणी बाई जी ने भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र को प्रस्तुत कर कहा कि भगवान बुद्ध के उपदेशों को अपने जीवन में उतारने से ही देश में और समाज में सद्भावना स्थापित होगी। जबकि मुंबई आश्रम से पधारे महात्मा अंबालिका बाई जी ने अपनी प्रभावशाली वाणी के द्वारा संबोधित करते हुए कहा कि आज लोगों में संस्कारों की कमी हो रही है जिससे हर घर में अशांति का वातावरण बना हुआ है। आगे उन्होंने कहा कि आज छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे वीरों के जीवन से हमें प्रेरणा लेकर हर समस्याओं का मुकाबला करना चाहिए। समाज में हो रहे अत्याचार, अनाचार ,संकुचित मानसिकता और दुख का सामना करना चाहिए; जिसके लिए अध्यात्म को अपने जीवन में अपनाना पड़ेगा ।
अंत में वसई आश्रम के प्रभारी महात्मा आचार्यानंद जी ने आशीर्वचन देकर कार्यक्रम का समापन किया । इसप्रकार दूर-दूर से पधारे जिज्ञासुगणों तथा भक्तगणों ने दिव्य प्रेरणा प्राप्त की।


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