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बाहर से संसारी लेकिन भीतर से संस्कारी रहो, भगवान के होकर रहो : पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री

 अमरज्योति न्यूज़ । प्रयाग उत्थान समिति के अध्यक्ष डाक्टर उदय प्रताप सिंह के द्वारा श्रीं बागेश्वर धाम सरकार की राष्ट्र हनुमंत कथा के अंतर्गत मंगलवार को प्रयागराज के अरैल क्षेत्र में आयोजित हनुमंत कथा में पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने व्यासपीठ पूजन के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन एकता और राम नाम के महत्व पर जोर दिया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही और भक्ति गीतों पर भक्त झूमते नजर आए।


कथा व्यास पं. धीरेन्द्र शास्त्री जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह "हिन्दुओं का महासंगम" है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज को जाति-पाति से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग चंदन-वंदन और हिन्दू आस्था से परेशान हैं, उन्हें अपना रास्ता बदल लेना चाहिए, अन्यथा भारत का कानून उन्हें सुधार देगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था का



उदाहरण देते हुए कहा कि यहां कानून व्यवस्था से कोई बच नहीं सकता। उन्होंने प्रयागराज को आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि संगम में आस्था का सबसे बड़ा कुंभ लगा है, जहां सनातन की शक्ति दिखाई देती है। उन्होंने

कहा कि "हम हिन्दू हैं, सनातनी हैं और हमें इसी पहचान के साथ संगठित होना होगा।"

कथा का शीर्षक सुंदरकाण्ड बताते हुए उन्होंने कहा कि यह वह कथा है जो जीवित मनुष्यों को भी भगवान का स्मरण

कराती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भगवान को सर्वस्व अर्पण करके जीता है, उसके जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि "बाहर से संसारी लेकिन भीतर से संस्कारी रहो, भगवान के होकर रहो।"

पं. शास्त्री जी ने संतों के सत्संग को जीवन की दिशा बताते हुए कहा कि संतों के संग बैठकर हरि नाम लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में अनेक संतों के दर्शन होते हैं, लेकिन संतों के प्रति प्रेम और श्रद्धा बनाए रखना आवशयक है।

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"राम नाम की माला ही जीवन का आधार" कथा में उमड़ा जनसैलाब


उन्होंने विनम्रता पर बल देते हुए कहा कि बड़ा बनने के लिए झुकना पड़ता है और अपने से बड़ों का सम्मान करना ही बड़प्पन है। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में सच्चा आराम चाहिए तो भगवान का नाम जपना चाहिए। उन्होंने राम नाम की माला का महत्व बताते हुए कहा कि जिस माला में राम नहीं, वह माला किसी काम कीa

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